Saturday, August 2, 2008

SAHIL's poem..on NDTV
www.ndtv.com/ent/bookspoetrycorner.asp?id=997

for SUNIL SAHIL's Hindi Poems -

http://www.anubhuti-hindi।org/kavi/s/sunil_sahil/index.htm




याद है तुम्हे

तब तुम कहाँ थी

तब मैं कहाँ था

जब उस खंडहर की मुंडेर के किनारे

झील में दो प्रतिबिम्बों को देखकर

एक रहस्य मुस्कुरा रहा था

जब मैं लिख रहा था एक गीत

तुम्हारी देह पर अपने होंठों से

जब तुम्हारे सुवासित गेसुओं की सुगंध

मेरी साँसों में घुल रही थी

और तुम्हारी जिव्हा मेरी गर्दन पर

पिघल रही थी

मेरे हाथ जब तुम्हे कसकर पकडे हुए थे

जब तुम काट रही थी मेरे कन्धों को हौले से

याद है तुम्हे

तब तुम कहाँ थी

तब मैं कहाँ था

उस पल ....

- साहिल



चलो आओ नृत्य करें
रात्री के गीत के लिए
अपनी देहों के साथ
गुथे हुए
- साहिल


जब भी तुम्हारी देह में
यात्रा पर निकलता हूँ
मिलता है एक छुपा हुआ खजाना
मेरे लिप्सा संसार में
एक अपरिचित आनंद
- साहिल

लगती है प्यास

तुरंत बाद

जब तुम मुझे भर कर

चली जाती हो

- साहिल