Thursday, October 29, 2009

पृथ्वी के सबसे खूबसूरत लोग

(ओशो ऑडिटोरियम के बाहर संध्या - ध्यान के समय )
पृथ्वी के सबसे खूबसूरत लोग
परी देश की कथाओं की तरह
आते हैं यहाँ
मौन धारे मुस्कुराते
जलते दीयों के बीच
संगीत की स्वर - लहरियों के संग
उठता है फ़िर एक उन्माद
और खो जाते हैं एक
अनजानी दुनिया में
जहाँ न संगीत रहता है
और न नृतक
बस फ़ैल जाता है नृत्य ही चारों तरफ़
और एक स्वर
मौन भाषा में करतें हैं स्वागत
एक रहस्य का
वो रहस्य...
जो परिचित है ... अपना है
बसा है कहीं अंतरतम में ...

- सुनील साहिल

जब तुम आती हो ...





जब तुम आती हो ....
बजने लगता है संगीत चारों ओर
छा जाता है सतरंग अनंत में
पंख फैलाये नृत्य करने लगते है मोर
नदिया में उठती है हिलोर
हृदय - धरा पर उतर जाती हो
जब तुम आती हो ....
थम जाती है झरनों की चाल
सरोवरों पर फूट पड़ता है किरणों का जाल
उग आते हैं पंख अचानक मेरी पीठ पर
तुम आसमान बन जाती हो
जब तुम आती हो ...
उग आता है पत्थरों के गर्भ से नरम घास
सूर्य आ बैठता है पास
घेर लेती हैं मुझे रंगीन तितलियाँ
केलि करने लगती है कुसुम - कलियाँ
गिलहरी सी चपला बन जाती हो
जब तुम आती हो ...
चांदनी रात में ही होने लगती है बरसात
लिपट जाते हैं बादल मुझसे
खिल जाती है धुप अचानक
कर लेती है आत्मसात
खिलखिला उठती है पृथ्वी
बतियाने लगते हैं सितारे
सारे के सारे
आकाश - गंगा बन जाती हो
जब तुम आती हो ...
तुम शकुन्तला का अनुराग
तुम गीतांजलि का राग
तुम उर्वशी का फाग
कामायनी की आग
तुम अजंता अलोरा ख्जुराह
कामदेव की चाह
तुम कुरान गीता
गंगा यमुन सरिता बन इठलाती हो
जब तुम आती हो ....जब तुम आती हो ....जब तुम आती हो ...
-- सुनील साहिल

Saturday, July 18, 2009



शब् के जागे हुए तारों को नींद आने लगी
आप के आने की उम्मीद थी जाने लगी
रात भर दीद-ऐ-नमनाक में लहराते रहे
साँस की तरह से आप आते रहे जाते रहे
खुश थे हम अपनी तम्मनाओं का ख्वाब आयेगा
नजरें नीचे किए शर्मा हुए आएगा
जुल्फें चेहरे पे बिखराए हुए आएगा
पत्तियां खडकी तो हम समझे की आप आ ही गए
सुबह ने सेज से उठते हुए ली अंगडाई
अ सुबह तू भी जो आई तो अकेली आई
मेरे महबूब मेरे होश उडाने वाले मेरे मस्जूद मेरी रूह पर छाने वाले
आ भी जा ताके मेरे सजदे का आरमान निकले
आ भी जा तेरे कदमो पे मेरी जान निकले
- मखदूम