

जब भी तुम सामने आती
सोचता ...
मन कि बात कह दूँ
कुछ हंसकर, मनाकर
गालों को छूकर
दिल के हालत कह दूँ
मगर पल ही में
लब सिल जाते
और सागर की लहरों की तरह
बेचैन हो करता तुम्हारा
अभिवादन ...
व आगे बढ़ा हाथ
होंठों पर रुकी बात
करती तुम्हे विदा भी
जाते ही तुम्हारे
होंठ बुदबुदाते हैं -
'तुम ही पहल करो न '
- साहिल





