
तुमसे मिलने के बाद
ऐसे तो कभी ना छुआ
हवा ने पहले मुझे
ना कभी सुने हवाओं के गीत
पहले भी तो चला था
पतझड़ से झरे
इन पत्तों से ढकी राह पर
आज सुनता हूँ इनकी धड़कनों से
निकलता शोर
कभी न की इतनी बातें
मुस्काते फूलों से
उड़ती धुल से आँखें बचाकर
नही निकलता अब
वरन करता हूँ उसका स्वागत
देह पर रम जाने को
ओस भी कोहरा भी
और शीत लहर
भिगो जाती है मेरी आत्मा को
और कोई मेरे भीतर मौन
स्वत लगता है खिलखिलाने
तारे कभी न लगे इतने उजले
आस्मान कभी न लगा इतना पास
और उसमे विचरते
परिंदों के संग
कभी न उड़ सका यूं पहले मैं
सांझ में छिपता
सूरज उड़ती गोधुली
गउओं के गले में बजती
घंटी के संग
कभी न नाचा मेरा हृदय
सच....
दुनिया कितनी खूबसूरत है
जाना ...
तुमसे मिलने के बाद
- साहिल
ऐसे तो कभी ना छुआ
हवा ने पहले मुझे
ना कभी सुने हवाओं के गीत
पहले भी तो चला था
पतझड़ से झरे
इन पत्तों से ढकी राह पर
आज सुनता हूँ इनकी धड़कनों से
निकलता शोर
कभी न की इतनी बातें
मुस्काते फूलों से
उड़ती धुल से आँखें बचाकर
नही निकलता अब
वरन करता हूँ उसका स्वागत
देह पर रम जाने को
ओस भी कोहरा भी
और शीत लहर
भिगो जाती है मेरी आत्मा को
और कोई मेरे भीतर मौन
स्वत लगता है खिलखिलाने
तारे कभी न लगे इतने उजले
आस्मान कभी न लगा इतना पास
और उसमे विचरते
परिंदों के संग
कभी न उड़ सका यूं पहले मैं
सांझ में छिपता
सूरज उड़ती गोधुली
गउओं के गले में बजती
घंटी के संग
कभी न नाचा मेरा हृदय
सच....
दुनिया कितनी खूबसूरत है
जाना ...
तुमसे मिलने के बाद
- साहिल
3 comments:
सुनील जी स्वागत है मदमस्त कर देने वाली धुन है आपकी कविताओं में
I loved your poems sahil ! aap ka fan - ronit
beautiful thought
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