
शब् के जागे हुए तारों को नींद आने लगी
आप के आने की उम्मीद थी जाने लगीरात भर दीद-ऐ-नमनाक में लहराते रहे
साँस की तरह से आप आते रहे जाते रहे
खुश थे हम अपनी तम्मनाओं का ख्वाब आयेगानजरें नीचे किए शर्मा हुए आएगा
जुल्फें चेहरे पे बिखराए हुए आएगापत्तियां खडकी तो हम समझे की आप आ ही गए
सुबह ने सेज से उठते हुए ली अंगडाई
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