Friday, April 9, 2010


न धुंए के गुबार में, न मय की बेहोशी में
बेलगाम ख्वाइशे, कितनी देहों से परिचय
सबसे पूछा पता तेरा
इस वीराने में तू रहता था !
- साहिल

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