
नानी कहती थी बचपन में -
परी सी दुल्हन लाना बेटा ॥!!
और आंखों में सुरमे के साथ एक चेहरा भी वह संजो देती थी...
वेबजाल क़ी मंडी में उस चेहरे को रोज बिकते देखा है...
नानी को भी अपनी दुआ कहाँ याद रही होगी ॥!!
-- साहिल
An Ordinary Man !!! into - PR, Poetry, Stage, Osho Meditation and Life ..
3 comments:
ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है
Dhanyavad Sanjay Ji...
Kiya baat hai Sahil Wonderful
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