
सागर किनारे
ख्यालों के बादल
उस पार नाव खेते जा रहे हैं
सरसराती हवा उन्हें
उनकी मंजिल तक धकेल रही है
राह में पत्थर हैं
नुकीली यादों की तरह
हवा भीगी हुई है
और खिड़की से आकर मेरे बालों को छु रही है
मैं बादलों को नयनो से थामे हूँ
रोशनी है कि सो गयी है चादर तान कर
चाँद सर पे आ खड़ा है
मुझे सब याद है !
सागर किनारे
हम दोनों चुप
तारों को देख रहे
हाथों में लिए हाथ
तुमने हौले से मेरा नाम पुकारा
मैंने तुम्हे देखा
तुम हौले से मुस्काई
और हौले से चूम लिया मुझको
मुझे सब याद है
मेरी साँसे थमी हैं
ये अकेली रात और यादें
मेरी आत्मा को लपेट लो
इस रात को चूम लो .....
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