
बच्चे बड़ों सी बातें करने लगे हैं
घर में सब खुश रहते हैं
कि उम्र से पहले ही 'स्मार्ट हो गए
और ........
बूढ़े बाबा की बातें सबको
बच्चों सी लगने लगी हैं ...!!
An Ordinary Man !!! into - PR, Poetry, Stage, Osho Meditation and Life ..



उठो भी अब
मन में भी एक झरना बहता है
फैली असीम नीरवता के किस्से कहता है
कोयल की कूक में भी सुनता है
अपने चेतन का गायन
सफ़ेद रुई सा बगुला अपनी चोंच डालता है
दरिया के पानी में और उसके छींटे
पड़ते हैं मेरे भीतर
लताएँ, फूल, डालियाँ और पत्तों ने
कह दी कई अनकही गाथाएँ
और कोई बुद्ध ध्यानमग्न है ज्यों
नही उठेगा अब भोर होने से पहले
बूढे वृक्षों की लम्बी शाखाओं को
छू लेता है मेरा किलकारी मारता मन
उठो भी अब ...
नया जनम हुआ है !
- साहिल


याद है तुम्हे
तब तुम कहाँ थी
तब मैं कहाँ था
जब उस खंडहर की मुंडेर के किनारे
झील में दो प्रतिबिम्बों को देखकर
एक रहस्य मुस्कुरा रहा था
जब मैं लिख रहा था एक गीत
तुम्हारी देह पर अपने होंठों से
जब तुम्हारे सुवासित गेसुओं की सुगंध
मेरी साँसों में घुल रही थी
और तुम्हारी जिव्हा मेरी गर्दन पर
पिघल रही थी
मेरे हाथ जब तुम्हे कसकर पकडे हुए थे
जब तुम काट रही थी मेरे कन्धों को हौले से
याद है तुम्हे
तब तुम कहाँ थी
तब मैं कहाँ था
उस पल ....
- साहिल
